बाबा जोगी एक अकेला, जाके तीरथ बरत न मेला। झोली पत्र बिभूति न बटवा, अनहद बैन बजावे। मांगि न खाइ न भूखा सोवे, घर अंगना फिरि आवे। पांच जना की जमाति चलावे, तास गुरू मैं चेला। कहे कबीर उनि देसि सिधाये बहुरि न इहि जग मेला।
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
हां, आज ही, जरूर आयें
विजय नरेश की स्मृति में आज कहानी पाठ कैफी आजमी सभागार में शाम 5.30 बजे जुटेंगे शहर के बुद्धिजीवी, लेखक और कलाकार विजय नरेश की स्मृति में ...

-
राजेन्द्र स्वर्णकार का जन्म २१ सितम्बर १९५९ को बीकानेर में पिता श्री शंकर लाल और मां श्रीमती भंवरी देवी के घर हुआ| लगभग सभी विधाओं में छ...
-
मनोज भावुक को साखी पर प्रस्तुत करते हुए मुझे इसलिये प्रसन्नता हो रही है कि वे उम्र में छोटे होते हुए भी अपनी रचनाधर्मिता में अनुभवसम्पन्न...
-
आप जानते हैं नीरज गोस्वामी को? अगर आप की दिलचस्पी शायरी में, कविता में है तो जरूर जानते होंगे| चौदह अगस्त उन्नीस सौ पचास को पठानकोट, जम्...
बधाई!!
जवाब देंहटाएंBahut badhiya!
जवाब देंहटाएंबधाई
जवाब देंहटाएंसमकालीन सरोकार के लिए बहुत बहुत शुभकामनाएं।
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत शुभकामनायें !
जवाब देंहटाएं