मंगलवार, 23 मार्च 2021

खेला होबे

खेला होबे, खेला होबे

खूबे मेला-ठेला होबे

मानुष मगर अकेला होबे
खेला होबे, खेला होबे

धूप में नाहीं पाके रे केस
हार के भइया जीते रे रेस
हम ही रे मुलुक, हमहीं रे देस
एक दंश पर खेला खतम
साथी आमार कोबरा होबे
खेला होबे, खेला होबे


निंदा-विंदा प्रूफ रे भाई
लाज न आई, बाप रे माई
भूख न जाई, जेतनो खाई
घोरे-घोरे शंख बजाई
जय श्रीराम मिल के कहिबे
जीना है तो डर के रहिबे
खेला होबे, खेला होबे

खेल में माहिर शकुनी अपन
झूठ के वचन, झूठ के सपन
बाहर चमन, भीतर गबन
डंका बाजे डम डम डम डम
एमन-ओमन जन-गन जन-मन
ना कुछ पावन, नाहीं अपावन
साथ तिवारी, चौबे, छब्बे
खेला होबे, खेला होबे

असोल पोरिवर्तन का मेला
जादूगर ने थैला खोला
अइलो-गइलो ठेलमठेला
चुप जो भैला, आमार चेला 
मुंह जो खोला, जेलम गेला
सीना पचपन, छप्पन, नब्बे
खेला होबे, खेला होबे

8/3/2021

हां, आज ही, जरूर आयें

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