बाबा जोगी एक अकेला, जाके तीरथ बरत न मेला।
झोली पत्र बिभूति न बटवा, अनहद बैन बजावे।
मांगि न खाइ न भूखा सोवे, घर अंगना फिरि आवे।
पांच जना की जमाति चलावे, तास गुरू मैं चेला।
कहे कबीर उनि देसि सिधाये बहुरि न इहि जग मेला।
गुरुवार, 28 जून 2012
अशोक रावत की गज़लें 8 जुलाई को
अशोक रावत की गज़लें साखी के अगले अंक में रविवार 8 जुलाई को।
कविता, उसके स्वरुप, जीवन में उसकी जरूरत पर कवि की टिप्पणी के साथ।
प्रतीक्षा करूँगा....
जवाब देंहटाएंशोक रहित आवत वारों को सुभाष नियोता पियारो लागे.
प्रतीक्षा है !
जवाब देंहटाएंमुझे भी प्रतीक्षा रहेगी।
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