गुरुवार, 28 जून 2012

अशोक रावत की गज़लें 8 जुलाई को

अशोक  रावत की गज़लें  
साखी के  अगले अंक में 
रविवार  8 जुलाई को। 

कविता, उसके स्वरुप, जीवन में उसकी जरूरत पर कवि  की टिप्पणी के साथ।

4 टिप्‍पणियां:

खेला होबे

खेला होबे, खेला होबे खूबे मेला-ठेला होबे मानुष मगर अकेला होबे खेला होबे, खेला होबे धूप में नाहीं पाके रे केस हार के भइया जीते रे रेस हम ही र...